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मानव की भूल हुई देखो, वायरस ने संकट डाला है, अभी घर में रहना वाशिंदों, ये वक़्त हमारा काला है!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा लॉक डाउन की अवधि को 3 मई तक बढ़ा दी गई है इस पर सभी की प्रतिक्रियाएं आना चालू हो गई सभी अपने अपने कार्य क्षेत्र की बोली का उपयोग करते हुए समाज, राज्य और राष्ट्र को संबोधित एवं अपील कर रहे हैं इसी बीच कवि हरेंद्र त्यागी ने कोरोना के संकट पर एक छोटी सी कविता लिखी है आइए देखते हैं क्या संदेश है इस कविता में –

“कोरोना संकट पर कविता”
मानव की भूल हुई देखो, वायरस ने संकट डाला है,
अभी घर में रहना वाशिंदों! ये वक़्त हमारा काला है,
सड़कों पर मौतें घूम रहीं, घड़ी ये कैसी आई है,
बेबस मानव के मन में घनघोर निराशा छाई है,
कोमल मानवता के पैरों में ये कांटा आज चुभा है,
बस डींग हांकता है मानव,ये अहसास आज हुआ है।
पर हर पतझड़ के बाद बसंत का आना है तय,
खुद को संयम में रख लो तो होगी अपनी जय।”

– हरेंद्र त्यागी

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